ममता कालिया के साहित्य में सामाजिक बंधनों से मुक्ति की नारी-संवेदना
DOI:
https://doi.org/10.56614/hyq2p891Keywords:
ममता कालिया, नारी-संवेदना, सामाजिक बंधन, स्त्री-अस्मिता, समकालीन हिंदी कथाAbstract
सार समकालीन हिंदी साहित्य में ममता कालिया एक ऐसी सशक्त रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने स्त्री-जीवन की आंतरिक पीड़ा, सामाजिक बंधनों और उनसे मुक्ति की आकांक्षा को अत्यंत यथार्थपरक और संवेदनशील ढंग से अभिव्यक्त किया है। उनका साहित्य मध्यवर्गीय नारी की मानसिक, सामाजिक और वैचारिक संघर्ष-यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य ममता कालिया की प्रमुख कहानियों एवं उपन्यासों के आलोक में यह विश्लेषण करना है
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Copyright (c) 2025 हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873

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