पार्वती तिर्की की कविताओं में आदिवासी चेतना के स्वर

Authors

  • रीता सूर्यवंशी, डॉ. राजाराम परते Author

DOI:

https://doi.org/10.56614/b8paeb54

Keywords:

आदिवासी, चेतना, विश्लेषण, संस्कृति, शब्दावली, विस्थापन।

Abstract

समकालीन हिंदी कविता की विशिष्ट हस्ताक्षर पार्वती तिर्की के काव्य में निहित 'आदिवासी चेतना' का विश्लेषण करता है। मुख्यधारा के साहित्य में आदिवासियों के प्रति प्रायः एक 'बाहरी' दृष्टि रही है, किंतु तिर्की की कविताएँ स्वयं के अनुभव और अपनी जड़ों के बोध से उपजती हैं।

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Published

2026-01-22

How to Cite

पार्वती तिर्की की कविताओं में आदिवासी चेतना के स्वर. (2026). हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873, 4(1), 5-10. https://doi.org/10.56614/b8paeb54

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