भारतीय दर्शन में कर्म सिद्धांत: शास्त्रीय ग्रंथों के संदर्भ में समीक्षा

Authors

  • डॉ. सुरेंद्र शर्मा Author

DOI:

https://doi.org/10.56614/b4v1jx58

Keywords:

कर्म, कर्म सिद्धांत, भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, मोक्ष

Abstract

भारतीय दर्शन में कर्म सिद्धांत का अध्ययन सदियों से होता आ रहा है। यह केवल व्यक्ति के व्यवहार का नियमन नहीं करता, बल्कि उसके जीवन, पुनर्जन्म, और मोक्ष की प्रक्रिया का भी आधार है। विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों में कर्म सिद्धांत का विवेचन अलग-अलग दृष्टिकोणों से हुआ है। वेदों में कर्म मुख्यतः सामाजिक और धार्मिक कर्तव्यों के रूप में देखा गया है, जबकि उपनिषदों में आत्मा और ब्रह्म के संदर्भ में कर्म का प्रभाव स्पष्ट किया गया है। भगवद्गीता में कर्मयोग के माध्यम से निष्काम कर्म और मोक्ष की प्राप्ति पर बल दिया गया है। इस लेख में इन सभी दृष्टिकोणों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही आधुनिक समय में कर्म सिद्धांत के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आयामों पर भी प्रकाश डाला गया है।

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Published

2024-09-07

How to Cite

भारतीय दर्शन में कर्म सिद्धांत: शास्त्रीय ग्रंथों के संदर्भ में समीक्षा. (2024). हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873, 2(2), 19-26. https://doi.org/10.56614/b4v1jx58

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