भूमिका, पुराणों का स्वरूप और महत्व, इतिहास और मिथक का प्रारंभिक विश्लेषण

Authors

  • अपर्णा यादव Author

DOI:

https://doi.org/10.56614/5hjptt88

Keywords:

पुराण, इतिहास, मिथक, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, सामाजिक चेतना

Abstract

भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में पुराणों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ये ग्रंथ न केवल धार्मिक आख्यानों का संकलन हैं, बल्कि भारतीय समाज की सामाजिक संरचना, नैतिक मूल्यों, ऐतिहासिक चेतना और दार्शनिक दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करते हैं। पुराणों के माध्यम से देवताओं, ऋषियों, राजाओं और लोकनायकों की कथाएँ प्रसारित हुईं, जिनमें इतिहास और मिथक का एक जटिल अंतर्संबंध विद्यमान है। प्रस्तुत समीक्षा-लेख का उद्देश्य पुराणों की संरचना, उनके वैचारिक आधार तथा इतिहास और मिथक के पारस्परिक संबंधों का प्रारंभिक विश्लेषण करना है। यह अध्ययन यह समझने का प्रयास करता है कि किस प्रकार पुराण भारतीय समाज की सामूहिक स्मृति को संरक्षित करते हैं और इतिहास-बोध को मिथकीय आवरण में प्रस्तुत करते हैं।

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Published

2024-09-12

How to Cite

भूमिका, पुराणों का स्वरूप और महत्व, इतिहास और मिथक का प्रारंभिक विश्लेषण. (2024). हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873, 2(2), 55-61. https://doi.org/10.56614/5hjptt88

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