बौद्ध एवं जैन साहित्य में अहिंसा की संकल्पना: एक तुलनात्मक समीक्षा
DOI:
https://doi.org/10.56614/2ks42084Keywords:
अहिंसा, बौद्ध साहित्य, जैन साहित्य, करुणा, अपरिग्रह, जीवदया, भारतीय दर्शन, तुलनात्मक अध्ययनAbstract
अहिंसा भारतीय दर्शन की एक मौलिक और केन्द्रीय अवधारणा है, जिसका सर्वाधिक व्यवस्थित एवं दार्शनिक विकास बौद्ध और जैन साहित्य में देखने को मिलता है। यद्यपि अहिंसा की जड़ें वैदिक परंपरा में भी उपलब्ध हैं, किंतु बौद्ध और जैन दर्शनों ने इसे नैतिक आचरण, साधना और मोक्ष-मार्ग का अनिवार्य आधार बना दिया।
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2024-09-11
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Copyright (c) 2024 हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873

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How to Cite
बौद्ध एवं जैन साहित्य में अहिंसा की संकल्पना: एक तुलनात्मक समीक्षा. (2024). हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873, 2(2), 46-54. https://doi.org/10.56614/2ks42084

