महेंद्र फुसकेले की कहानियों में ‘स्त्री चेतना के स्वर’
DOI:
https://doi.org/10.56614/vcc9wz42Keywords:
स्त्री चेतना, अस्मिता ,पितृसत्ता सामाजिक यथार्थ, महेंद्र फुसकेलेAbstract
समकालीन हिंदी कथा साहित्य में स्त्री चेतना एक सशक्त विमर्श के रूप में उभर कर सामने आई है। स्त्री अब केवल सहनशील त्यागमयी या पीड़िता के रूप में चित्रित नहीं होती, बल्कि अपने अधिकारों,अस्मिता और अस्तित्व के प्रति सजग दिखाई देती है। अपने अधिकारों के प्रति लड़ती हुई दिखाई देती है। महेंद्र फुसकेले की कहानिया सामाजिक यथार्थ से जुड़ी हुई है
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2026-01-24
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Articles
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Copyright (c) 2026 हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873

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How to Cite
महेंद्र फुसकेले की कहानियों में ‘स्त्री चेतना के स्वर’. (2026). हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873, 4(1), 15-17. https://doi.org/10.56614/vcc9wz42

