प्रतिनिधि महिला उपन्यासकारों द्वारा सामाजिक सम्बन्धों का चित्रण: स्त्री-पुरुष के विभिन्न संदर्भ में
DOI:
https://doi.org/10.56614/x40gas65Keywords:
स्त्री-विमर्श, महिला उपन्यासकार, सामाजिक सम्बन्ध, पितृसत्ता, दाम्पत्य, हिन्दी उपन्यासAbstract
प्रस्तुत शोध-आलेख हिन्दी की प्रतिनिधि महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के चित्रण का विश्लेषण करता है। कृष्णा सोबती, मन्नू भण्डारी, उषा प्रियंवदा, मृदुला गर्ग, प्रभा खेतान, मैत्रेयी पुष्पा, चित्रा मुद्गल और गीतांजलि श्री की रचनाओं को दाम्पत्य-पारिवारिक, प्रेम और देह-सम्बन्धी, कार्यक्षेत्र एवं ग्रामीण समाज-सम्बन्धी तथा बदलते सम्बन्धों के सन्दर्भों में पढ़ा गया है। निष्कर्ष है कि इन उपन्यासों में स्त्री सहनशील ‘त्याग-मूर्ति’ से अपने जीवन के निर्णय लेने वाली कर्ता बनी है, पर पितृसत्ता नये रूपों में बनी रहती है; इसलिए सम्बन्ध यहाँ आदर्श नहीं, निरन्तर संवाद और संघर्ष के क्षेत्र हैं।
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Copyright (c) 2026 हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873

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