बुंदेली लोकगीतों में पर्यावरण: एक संक्षिप्त दृष्टि
DOI:
https://doi.org/10.56614/vc2t9p54Keywords:
बुंदेली लोकगीत, पर्यावरण, प्रकृति चित्रण, बुंदेली लोकगीतों में पर्यावरण, बुन्देलखण्डAbstract
ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज का समय सोशल मीडिया का समय है ।कोई भी चीज़ बहुत जल्दी समाज के हर व्यक्ति के पास पहुँच जाती है ऐसे कुछ- एक लोकगीत भारत वर्ष में फैल जाते हैं जिस कारण जन सामान्य अपने मन में ये भ्रांति पाल लेता है कि लोकगीत तो बस हंसी- ठिठोली या मनोरंजन का ही विषय है
Downloads
Published
2026-01-27
Issue
Section
Articles
License
Copyright (c) 2026 हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NoDerivatives 4.0 International License.
How to Cite
बुंदेली लोकगीतों में पर्यावरण: एक संक्षिप्त दृष्टि. (2026). हिन्द खोज: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका (HIND KHOJ: Antarrashtriya Hindi Patrika), ISSN: 3048-9873, 4(1), 26-30. https://doi.org/10.56614/vc2t9p54

